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Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full _top_

बोलकर आज्ञा लें और 'इच्छं' कहें।

जयतळायु तीरथ वंदूं भावसुं, चरम जिनेश्वर पाय।मरुदेवा माता सुर-विमाने बेसीने, केवल लही मोक्ष जाय॥ १ ॥शत्रुंजय समो तीरथ नहीं कोई जगमां, सिद्ध भये अनंत मुनीश।तेहना चरणकमल वंदन करीने, नमाउं त्रिजगनो ईश॥ २ ॥फागण सुद तेरस दिन मोटो, कोडि पांच मुनिराज।थावच्चापुत्र मुनिराज वर प्रधान, सिद्ध भया सरसाव्या काज॥ ३ ॥विमलवाहन आदि जिनवर केरा, पादपद्म धरी ध्यान।'कीर्तिविजय' कद्दे शिवसुख लेशे, जे करशे तीरथ ध्यान॥ ४ ॥

"आदि जिनवर राया, जस सोवन काया" — यहाँ भक्त भगवान के 108 शुभ लक्षणों और उनके भव्य रूप की स्तुति करते हैं।

सेवकना संकट हरो, सारो वांछित काज। 2 ॥ भावार्थ: palitana 5 chaityavandan in hindi full

Performed at the sacred Rayan tree where the first Tirthankara, Lord Adinath, used to sit in meditation. :

अब यात्री आगे बढ़ता है। रास्ते में उसे दिखती है। कहानी है कि राजा कुमारपाल सोलंकी ने 12वीं शताब्दी में पालीताना मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया था। वे स्वयं इसी गुफा में तपस्या करते थे।

शांतिनाथ भगवान 16वें तीर्थंकर हैं। उन्हें "मृग लांछन" और "कंचन वर्णी काया" वाला बताया गया है। लाख वरस प्रमाण

यह अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण वंदन मुख्य गंभारे (गर्भग्रह) में भगवान आदिनाथ (दादा) की विशाल प्रतिमा के सम्मुख किया जाता है।

शत्रुंजय गिरिराज पर एक क्षण का भाव-वंदन करोड़ों उपवासों के समान फलदायी माना गया है।

शांति जिनेश्वर सोळमा, अचिरासुत वंदो;विश्वसेनकुल नभोमणी, भविजण सुख कंदो।मृगलांछन जिन आउखुं, लाख वरस प्रमाण;हस्तिनापुर नगरी धणी, प्रभुजी गुण मणिखाण।समकित दायक सोहामणो, सुरनर पूजित पाय;'पद्म' कहे प्रभु भक्तिथी, संकट दूर पलाय। हस्तिनापुर नगरी धणी

आदीश्वर जिनरायना, गणधर गुणवंत;प्रगट नाम पुंडरीक जस, महिमाए महांत।पांच कोडी मुनींद साथ, अणसण तीहां कीध;शुक्ल ध्यान ध्याता अमल, केवळ वर लीध।चैत्री पूनमने दीने ए, पाम्या पद महानंद;ते पुंडरीक मुख आगळ, वंदूं धरी आणंद।

यह वंदन शत्रुंजय पर्वत की तलहटी में स्थित "जय तलेटी" शिला पर किया जाता है। भक्त पर्वत पर चढ़ने से पहले इस पवित्र स्थान को नमन करते हैं।

तेहना गुण गण गाय, पातक सघला प्रज्वले। 1 ॥

४. चतुर्थ चैत्यवंदन: श्री पुंडरीक स्वामी चैत्यवंदन

2. द्वितीय चैत्यवंदन: श्री शांतिनाथ प्रभु (Shanti-Ashtapad Chaityavandan)